Wednesday, November 7, 2018

कवर स्टोरी

स्कूल और घर में कोई ना कोई हंगामा लगा ही रहता था- बिलकुल ऐक्शन फ़िल्मों की तरह. मज़ा तो उस दिन आया जिस दिन बंटू उसको ले कर आया.आप सोच नहीं सकते कितना हंगामा मच गया था पूरी क्लास में! सब बच्चे उस की एक झलक देखना चाहते थे. सब लोगों में खुसर- पुसर हो रही थी, लड़कियों में गुपचुप बातें हो रही थी और माहौल कुछ अलग ही लग रहा था. तभी कोई आवाज़ आयी, “आज आने दो शर्मा मैडम को इस बंटू की शिकायत करेंगे, ऐसी चीज़ें कोई स्कूल में लाता है ?” पीछे पलट कर देखा तो बबली अपनी सहलियों से कह रही थी. अरे भाई ऐसा क्या भूकम्प आ गया इस मरियल क्लास में, जो सब उछल रहे थे!
मेरी और जग्गू की समझ से बिलकुल परे था ये हंगामा. भई, हम तो बंटू की लीग में आते ही नहीं थे- कहाँ वो और कहाँ हम! वो तो हमेशा नई- नई चीज़ें लाता था जो उसके लिए उसकी लंदन वाली मौसी और कनाडा वाले मामा भेजा करते थे. जानते हैं, वो भी फ़ोरेन कंट्री घूम कर आया था पिछले साल! उसके पिताजी उसे नेपाल ले गए थे और एक हमारे है, जिनसे हमारी बात करने की हिम्मत ही नहीं होती.हमारे सरसों के तेल से चमकाए बालों की महक की वजह से लड़कियाँ क्या लड़के भी एक हाथ का फ़ासला बनाए रखते हैं हमसे. कितनी बार माँ को समझाया पर हमारी बात की तो कोई अहमियत ही नहीं है. चलिए जाने दीजिए, लौटते हैं बंटू के कांड पर...
हमने बहुत बारी उसके डेस्क तक जाने की कोशिश की पर हमारे हाथ सिर्फ़ नाकामी ही लगी. क्लास में बंटू अपने चेलों के साथ घिरा बैठा रहा और हम ये सोचते रहे के कैसे जा कर देखे की वो क्या लाया है. उसके ग्रूप के बच्चे ख़ूब मज़े से उसके साथ बैठ कर देख रहे थे. हम जैसे- तैसे हिम्मत करके उसके डेस्क पर पहुँच गए और हमारी नज़र जैसे ही उस पर पड़ी तो हम भौंचके रह गए. “ अबे यह क्या ले आया? तेरी तो आज ख़ूब धुलाई होगी!”, मैंने उसे बोला. उसके पास थी प्लेबॉय मैगज़ीन, जिसमें लड़कियों के अश्लील तस्वीरें होती है! 
सच जानिये हमारे पैरों तले ज़मीन ही खिसक गयी और बंटू की हिम्मत देखिए की वो ऐसी मैगज़ीन स्कूल ले आया. कितना दबंग! हमारे लिए तो वो कुछ टाइम के लिए रोल मॉडल ही बन गया था. 
आज से पहले किसी ने इतनी हिम्मत नहीं करी थी. हमें तो कवर की एक झलक ही मिली. इससे पहले हम आगे बढ़ कुछ और देख पाते ठाकुर सर ने क्लास में एंट्री मार दी. हम रिवर्स गीयर में पीछे हो लिए और चुगलख़ोर लड़कियाँ फ़ुल स्पीड में सर के पास!
फिर आगे की क्या कहूँ, भयानक नज़ारा था! सर डाइव मार कर बंटू के डेस्क पर और इस से पहले वो मैगज़ीन को  छिपा पता, मैगज़ीन सर के हाथ में. फिर क्या था, दे-दना-दन-दे! उसकी ऐसे धुलाई हुई की वो और उसका चेहरा किसी मैगज़ीन के कवर पेज पर क्या अंदर के पेज में भी छपने के लायक ना रहा.

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